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BASIR BADAR SHAYARI मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला । अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला ।। कभी-कभी तो छलक पड़ती हैं यूँ ही मेरी आंखें । उदास होने का कोई सबब नहीं होता ।। बे वकत अगर जाउंगा सब चौंक पड़ेंगे । एक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा ।। कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तापक से । ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो ।। उजाले अपने यादों के हमारे साथ रहने दो । न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाए ।। ( बसिर बदर )